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Thursday, December 29, 2016

दोहे

दोहे
धूप न निकली आज भी, गये कई दिन बीत।
सर्द हवा भीतर घुसे, छेद देह की भीत।
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सर्द हवाएँ तीर सी, बींध रहीं हैं देह।
सूरज की किरणें भली, बरसाती हैं नेह।
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अलसायी सी धूप है, सूरज है हैरान।
कोहरे के आतंक से, सहमी उसकी जान।


 

Friday, June 22, 2012

दोहा

दोहा

हाथ हाथ पर धरि रहे, बैठ भरोसे भाग।
करमहीन ते नरन के, हाथे ना कछु लाग।